सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (16 अक्टूबर) को नकदी संकट से जूझ रही जेट एयरवेज के ऋणदाताओं द्वारा NCLAT के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा जिसमें एयरलाइन्स का स्वामित्व सफल समाधान आवेदक (SRA) को हस्तांतरित करने की अनुमति दी गई है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अन्य कर्जदाताओं की याचिका पर सुनवाई 16 अक्टूबर को पूरी हो गई थी और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. याचिका में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसने जेट एयरवेज के समाधान योजना को बरकरार रखा और इसके स्वामित्व को जलान कालरॉक कंसोर्टियम (JKC) को स्थानांतरित करने की मंजूरी दी थी.
NCLAT ने 12 मार्च को बंद पड़ी जेट एयरवेज की समाधान योजना को बरकरार रखा था और इसके स्वामित्व को जालान कालरॉक कंसोर्टियम (JKC) को सौंपने की मंजूरी दी थी. साथ ही अपीलेट ट्रिब्यूनल ने जेट एयरवेज की निगरानी समिति को 90 दिनों के भीतर स्वामित्व हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था. इसके अलावा, NCLAT ने जेट एयरवेज के ऋणदाताओं को कंसोर्टियम द्वारा प्रदर्शन बैंक गारंटी (PBG) के रूप में जमा किए गए 150 करोड़ रुपये को समायोजित करने का आदेश भी दिया था.SBI, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और JC फ्लॉवर्स एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने NCLAT के 12 मार्च के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
4783 करोड़ रुपये का करना था भुगतान
समाधान योजना के अनुसार, जालान कलरॉक कंसोर्टियम को 4783 करोड़ रुपये का भुगतान करना था तथा सहमति के अनुसार भुगतान की पहली किश्त में 350 करोड़ रुपये डालने थे. 18 जनवरी के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के 8 अगस्त, 2023 का निर्णय रद्द कर दिया, जिसमें SRA को 350 करोड़ रुपये के भुगतान की पहली किश्त को परफॉरमेंस बैंक गारंटी (PBG) के विरुद्ध समायोजित करने की अनुमति दी गई थी, जिसे ऋणदाताओं द्वारा सुरक्षा के रूप में दिया गया था.




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