छत्तीसगढ़

बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं को समर्पित बस्तर पंडुम का लोगो, थीम गीत का विमोचन किया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय |

बस्तर पंडुम सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की है आत्मा- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय |

नितेश मार्क/भास्कर दूत
दंतेवाड़ा, 02 जनवरी 2026। बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य और आकर्षक रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो, थीम गीत का विमोचन किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री एवं जिला दंतेवाड़ा के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी, सहित बस्तर आईजी सुंदरराज पी., संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय, जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, वन मंडलाधिकारी जाधव सागर एवं अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम, बस्तर की असली आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त मंच है। आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहाँ बस्तर पंडुम-2026 का “लोगो” और “थीम गीत” का विमोचन किया है। बस्तर पंडुम सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक-परंपराओं, कला और विरासत का मंच है। छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के जरिए इन परम्पराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले साल हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी,तब समापन अवसर पर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस बार हम राष्ट्रपति महोदया को, माननीय केन्द्रीय गृहमंत्री और केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री समेत भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर हमारे बस्तरवासियों का जोश, उत्साह खूब देखने को मिला। इस बार हम इसे और भव्य बना रहे हैं ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान बना पाए।इस बार बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धा में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर 12 की गई है। इसमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति तो होगी ही, इसके साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को शामिल किया गया है।
इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाएँ। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं, शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा।
उन्होंने बस्तरवासियों और सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह है कि अपनी कला से बस्तर को गौरवान्वित करें, अधिक-से-अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित होने वाली प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लें। बस्तर पंडुम आपका उत्सव है, इसे मिलकर सफल बनाएँ, माँ दंतेश्वरी की कृपा से यह उत्सव सफल हो, बस्तर समृद्ध और शांत हो। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि पंडुम का मतलब होता है पर्व, बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के समय समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा है, इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से किया जा रहा है। बस्तर, समृद्ध संस्कृति से भरापूरा है, बस्तर क्षेत्र में निवास करने वाले जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य संगीत, खानपान को समाहित कर इसको विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। पचास सालों का बस्तर बदल रहा है बस्तर में शांति की प्रयास अब सफल हो रहा है मार्च 2026 तक लाल आंतक समाप्त हो कर रहेगा।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति, परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध संस्कृति और पहचान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्री राम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय गुजारा है। ऐसे क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है। उन्होंने कहा कि बस्तर प्रदेश का ऐसा क्षेत्र है जो यहां बस गया वह तर गया।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत वाली बस्तर क्षेत्र के विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम का आयोजन सरकार द्वारा लगातार दूसरे वर्ष कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री, पर्यटन मंत्री ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजन तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकार के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारपंरिक नेतृत्व कर्ता मांझी और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार का आभार जताया।

ज्ञात हो कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इस वर्ष बस्तर पंडुम में विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की जा रही है। जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएं होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं। इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत के विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया। प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों और समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खान-पान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों के 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts