छत्तीसगढ़

वंदे भारत एक्सप्रेस में नई पहल, महिला टीटीई संभालेंगी टिकट जांच की कमान

बिलासपुर। नए साल की शुरुआत के साथ ही वंदे भारत एक्सप्रेस में बिलासपुर रेल मंडल ने एक अहम और सराहनीय बदलाव किया है। अब इस ट्रेन में टिकट जांच की जिम्मेदारी महिला टीटीई को सौंपी गई है। पहले दिन तीन महिला और दो पुरुष कर्मचारियों ने मिलकर नागपुर तक टिकट जांच की और वापसी में भी यही व्यवस्था रही। आगे चलकर एक और महिला टीटीई को ड्यूटी पर लगाने की योजना है।

वंदे भारत एक्सप्रेस को रेलवे की खास और प्रीमियम ट्रेनों में गिना जाता है। आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ इसकी कार्यप्रणाली भी अन्य ट्रेनों से अलग है। टिकट जांच करने वाले टीटीई राजधानी एक्सप्रेस जैसी विशेष यूनिफॉर्म में नजर आते हैं, जिसमें कोर्ट टाई शामिल होती है। इसी वेशभूषा में महिला टीटीई ने यात्रियों का टिकट चेक किया, जो यात्रियों के लिए एक नया अनुभव रहा।

पहले दिन इन महिला टीटीई को मिली जिम्मेदारी

पहले दिन जिन महिला कर्मचारियों को यह जिम्मेदारी दी गई, उनमें नेहा गुजर, निशा सिन्हा, प्रीति और प्रियंका यादव शामिल रहीं। सभी वाकी-टाकी और जरूरी जांच उपकरणों के साथ ड्यूटी पर तैनात रहीं। अब ये महिला टीटीई नियमित रूप से इस ट्रेन में सेवाएं देंगी।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि महिला टीटीई की ड्यूटी से यात्रियों के साथ होने वाले अनावश्यक विवाद कम होते हैं और टिकट जांच प्रक्रिया भी सहज रहती है।

महिला दिवस तक पूरी तरह महिला स्टाफ की तैयारी

रेल मंडल का लक्ष्य है कि 8 मार्च, महिला दिवस तक वंदे भारत एक्सप्रेस में केवल महिला टिकट जांच स्टाफ ही तैनात किया जाए। चूंकि यह ट्रेन सुबह बिलासपुर से रवाना होकर शाम करीब 7:30 बजे वापस लौट आती है, इसलिए महिला कर्मचारियों के लिए ड्यूटी करना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है।

सप्ताह में छह दिन चलती है ट्रेन

बिलासपुर से नागपुर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन चलती है। शनिवार को ट्रेन का परिचालन बंद रहता है, जिस दिन मेंटेनेंस और सफाई का कार्य किया जाता है। ट्रेन की देखरेख के लिए कोचिंग डिपो के पास अलग शेड भी तैयार किया जा रहा है, जहां वाशिंग लाइन सहित अन्य सुविधाएं होंगी।

इस फैसले के प्रमुख फायदे

टिकट जांच के दौरान विवाद की संभावना कम
अकेली महिला यात्रियों में सुरक्षा और भरोसा बढ़ेगा
महिला यात्री अपनी समस्याएं खुलकर साझा कर सकेंगी
वंदे भारत एक्सप्रेस को एक अलग और सकारात्मक पहचान मिलेगी

रेलवे की यह पहल न सिर्फ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है, बल्कि यात्रियों के अनुभव को भी बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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