छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा खत्म, औपनिवेशिक व्यवस्था पर गृह विभाग का बड़ा फैसला

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लेते हुए राज्य में गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा को समाप्त कर दिया है। अब मंत्रियों और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सामान्य दौरे, निरीक्षण और जिला भ्रमण के दौरान सलामी गार्ड नहीं दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था औपनिवेशिक दौर की देन थी, जो वर्तमान प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप नहीं है।

हालांकि, यह निर्णय राष्ट्रीय और राजकीय आयोजनों पर लागू नहीं होगा। गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, शहीद पुलिस स्मृति दिवस (21 अगस्त), राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर), राजकीय समारोहों और पुलिस दीक्षा परेड जैसे अवसरों पर पहले की तरह गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता रहेगा। गृह विभाग ने इस संबंध में नियमों में संशोधन कर आदेश जारी कर दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

यह पहल उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर की गई। समीक्षा के दौरान गृह विभाग ने पाया कि इस परंपरा के कारण पुलिस बल का समय और संसाधन औपचारिकताओं में खर्च होता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। नए आदेश के तहत अब राज्य के भीतर आगमन-प्रस्थान, निरीक्षण या सामान्य दौरे के दौरान गृहमंत्री, अन्य मंत्री, पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सलामी गार्ड नहीं मिलेगा।

सरकार का कहना है कि इस फैसले से पुलिस बल अनावश्यक प्रोटोकॉल से मुक्त होगा और कानून-व्यवस्था, सुरक्षा तथा जनसेवा जैसे अपने मूल कर्तव्यों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान दे सकेगा।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों और विशिष्ट अतिथियों के लिए तय प्रोटोकॉल के तहत गार्ड ऑफ ऑनर की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

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