प्रतापपुर ब्लॉक के गोन्दा गांव के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की खस्ता हालत ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्याह्न भोजन, जो बच्चों को पौष्टिकता देने के लिए चलता है, अब उनकी सेहत के लिए खतरा बन गया है।
ग्राम पंचायत के माध्यमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में परिजनों व ग्रामीणों ने जब खुद भोजन सामग्री की जांच की, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई—
चावल में कीड़े और कंकड़
सोयाबीन में सड़ी हुई सामग्री
सब्जी में बदबूदार आलू
और बेहद घटिया, संदिग्ध क्वालिटी का तेल, जिसमें कीड़े भी मिले
परिजनों ने बताया कि बच्चे मिड-डे मील खाने के बाद पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी की शिकायत करने लगे, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई। भोजन की गुणवत्ता लंबे समय से खराब थी, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
6 साल से बीईओ एक ही पद पर जमे
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मन्नूलाल धुर्वे पिछले छह वर्षों से इसी पद पर तैनात हैं। स्कूलों की बदहाल स्थिति के बावजूद उनके खिलाफ किसी ठोस कार्रवाई का अभाव विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। कलेक्टर द्वारा निलंबन की अनुशंसा के बावजूद वे अभी भी पद पर बने हुए हैं।
समूह संचालन पर भी सवाल
मिड-डे मील संचालन शिव शक्ति स्व सहायता समूह के हाथ में है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि समूह की वास्तविक जिम्मेदारी एक ढाबा संचालक के परिवार के पास है। निर्धारित मेन्यू का पालन नहीं होता और हरी सब्जी महीने में एक-दो बार ही बनती है।
जांच के निर्देश जारी, ग्रामीणों का भरोसा कमजोर
डीईओ अजय मिश्रा ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और बीईओ को मौके पर भेजने को कहा है। हालांकि, ग्रामीणों को विभाग की कार्रवाई पर संदेह है। उनका कहना है कि जब अधिकारी वर्षों से लापरवाही कर रहे हैं, तो दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद कैसे की जाए?




