वैश्विक साहित्य सम्मान से सम्मानित हुये।
दिल्ली और भोपाल से 52 वर्षों से निरंतर प्रकाशित गांधीवादी,समाजवादी वैचारिकता के निर्दलीय पब्लिकेशन के 52 वें स्थापना दिवस के वार्षिकोत्सव 6 जुला 25 को गांधी भवन भोपाल में ख्यातिप्राप्त साहित्यकार,कवि संजीव ठाकुर को विशिष्ट अतिथि बनकर वैश्विक साहित्य सम्मान और राष्ट्रीय ज्ञान प्रज्ञा पुरस्कार से सम्मानित किया गयाl प्रतिष्ठापूर्ण इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व आई,ए,एस शरद चंद्र बेहार,अध्यक्ष प्रख्यात रचनाकार,कवि राजेश जोशी , विशिष्ट अतिथि कवि कथाकार,लेखक संजीव ठाकुर और सारस्वत अतिथि लेखके, पत्रकार चिन्मय मिश्र एवं निर्दलीय प्रकाशन समूह भोपाल दिल्ली के संपादक संचालक कैलाश श्रीवास्तव ‘आदमी’ एवं प्रिंस अभिषेक अज्ञानी की उपस्थित थे. इस प्रतिष्ठा पूर्ण आयोजन के अवसर पर कवि संजीव ठाकुर को वैश्विक साहित्य सम्मान( अंतर्राष्ट्रीय रचनाकार सम्मान) राष्ट्रीय ज्ञान प्रज्ञा पुरस्कार से भी सम्मानित किया गयाl से सम्मानित भी किया । कवि संजीव ठाकुर के अलावा इस सम्मान नेपाल काठमांडू से कवित्री वीणा कर्ण को प्रवासी वैश्विक साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया उनकी एक किताब का भी विमोचनअंतर्राष्ट्रीय निर्दलीय मासिक पत्रिका एवं राष्ट्रीय संस्करण निर्दलीय दैनिक समाचार पत्र का विमोचन भी किया। गया निर्दलीय प्रकाशन का यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष निर्दलीय पब्लिकेशन के स्थापना दिवस 6 जुलाई को भोपाल और दिल्ली में मनाया जाता है कार्यक्रम में देश के 17 राज्यों एवं विदेश से आए शिक्षाविद,चिंतक,लेखक कवि एवं पत्रकारों को विभिन्न विधाओं में प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया ।अप्रवासी भारतीय कवि, लेखकों,प्राध्यापकों और साहित्यकारों को प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मान से विभूषित किया जाता है। उल्लेखनीय है कि चिंतक, लेखक,कवि श्री संजीव ठाकुर विगत 40 वर्षों से साहित्य सेवारत हैं, उनकी चार किताबें प्रकाशित हो चुकी है तथा लगभग 10 किताबें प्रकाशनाधीन है। श्री संजीव ठाकुर ने अनेक साहित्यिक यात्राऐं कर देश और विदेश से विभिन्न साहित्यिक पुरस्कार प्राप्त किए हैं। वे साहित्य की विधा कविता और आलेख में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित लेखक एवं कवि हैं। पिछले 5 वर्षों से लगातार प्रतिदिन एक कविता तथा आलेख देश के लगभग 100 से अधिक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं। वे देश की अनेक साहित्यिक संस्थाओं के राष्ट्रीय स्तर पर सलाहकार एवं संरक्षक भी हैं।





