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अमेरिका की हर बीमारी का इलाज करेगी हमारी फार्मा कंपनियां, डोनाल्ड ट्रंप ने माना लोहा, टैरिफ वार से रखा अलग

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया में हलचल मचा दी है. बुधवार को वाइट हाउस से ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की है. अमेरिका सभी देशों पर 10 परसेंट का बेस टैरिफ लगाएगा. कई देशों पर अमेरिका ने टैरिफ को बढ़ा दिया है. अमेरिका के मुताबिक भारत अमेरिकी आयात पर 52% टैरिफ लगाता है, इसलिए अब उसे 26 परसेंट के जवाबी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा. लेकिन इस टैरिफ वार में एक ऐसी चीज रही, जिसे ट्रंप ने छूने की हिम्मत नहीं की और यह भारत को बड़ा फायदा देगा. ट्रंप ने फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र को इससे बाहर कर दिया है. अमेरिका ने दवाइयों पर टैरिफ लगाने की हिम्मत इसलिए नहीं की, क्योंकि उसे पता है कि इसका असर भयानक होगा. यह टैरिफ वार से अलग, ट्रंप की मजबूरी भी दिखाता है.

वाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि फार्मास्युटिकल्स, कॉपर, सेमीकंडक्टर्स और लंबर जैसे उत्पादों को टैरिफ से छूट दी गई है. 2023 के आंकड़े के मुताबिक, अमेरिका हर साल 170 बिलियन डॉलर की दवाइयाँ आयात करता है. भारत जैसे देशों की इसमें बड़ी भूमिका है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के महानिदेशक राजा भानु का कहना है कि भारत हर साल अमेरिका को 8 बिलियन डॉलर से ज्यादा के मूल्य का सामान निर्यात करता है. जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति का एक अहम हिस्सा हैं.

अमेरिका की बीमारी ठीक करता है भारत
ट्रंप को पता है कि अगर वह दवाइयों पर भी टैरिफ लगाते तो यह अमेरिका की जनता पर बड़ा बोझ होता. दवाओं की कीमतें बढ़ने से अस्पतालों में संकट पैदा हो सकता था, जिससे अमेरिकी जनता सड़कों पर उतर सकती थी. ट्रंप इस तरह का कोई भी रिस्क लेना पसंद नहीं करेंगे, खासकर तब जब अमेरिका में मेडिकल सर्विस पहले से ही एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है. भारत की ओर से सबसे ज्यादा निर्यात करने वाली फार्मा कंपनियों की बात करें तो इसमें सन फार्मा, औरोबिंदो फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैब, सिप्ला और ल्यूपिन इसमें प्रमुख हैं. ये कंपनियाँ भारत के कुल फार्मा निर्यात का बड़ा हिस्सा संभालती हैं और अमेरिका को सस्ती दवाएँ मुहैया कराती हैं.

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