छत्तीसगढ़

हर्षोल्लास पूर्वक श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया गया डोल ग्यारस का पावन पर्व

*भगवान श्री नर- नारायण मंदिर के सामने से नगर भ्रमण के लिए निकला भगवान श्री हरि जी की शोभायात्रा*

धर्म एवं आध्यात्म की पावन धरा श्री शिवरीनारायण मठ में डोल ग्यारस का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक श्रद्धा -भक्ति के साथ मनाया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री नर- नारायण मंदिर के सामने भगवान के लिए रथ को परंपरागत रूप से सजाया गया फिर उसमें भगवान श्री हरि को विराजित करके भजन- कीर्तन के साथ शोभा यात्रा के रूप में नगर भ्रमण करते हुए महानदी के त्रिवेणी संगम तट पर ले जाया गया।
*हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव*
ग्राम खपरीडी जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ से आई हुई कीर्तन मंडली ने -हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा।। गाकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया

*नाव में बिठाकर भगवान को कराया गया जल बिहार*

विधि पूर्वक मंत्रोचार के साथ भगवान की पूजा अर्चना की गई तथा उन्हें नाव में बिठाकर जल विहार करने के लिए महानदी के संगम तक ले जाया गया, जल क्रीड़ा के पश्चात भजन कीर्तन करते हुए पुनः मठ मंदिर तक लाया गया।

*श्री हनुमान मंदिर एवं खंडेलिया परिवार की झांकी हुई शामिल*

शोभा यात्रा में श्री हनुमान मंदिर एवं खंडेलिया परिवार का भी भगवान श्री हरि की झांकी शामिल हुई ये परंपरागत रूप से हर वर्ष शोभायात्रा में शामिल होते हैं।
महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि -प्रत्येक माह में दो एकादशी होते हैं। सभी एकादशी भगवान की भक्ति एवं मोक्ष प्रदान करने वाली है। इन सभी एकादशी में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को जल झूलनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन साधकों को नदी -नालों या पवित्र स्थानों में स्नान करके भगवान की पूजा अर्चना करनी चाहिए। उन्हें नैवेद्य अर्पित कर विधिवत व्रत का पालन करनी चाहिए इससे भगवान प्रसन्न होते हैं एवं अपने भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। डोल ग्यारस के अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मठ मंदिर के मुख्तियार सुखराम दास जी, त्यागी जी महाराज एवं सभी अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी गण लगे हुए थे।

*महन्त जी ने कहा माता जी मैं स्वयं आ जाता हूं*
शोभा यात्रा नगर के विभिन्न गलियों से होकर गुजर रही थी माताएं अपने-अपने दरवाजे पर नारियल,फल- फूल, अगरबत्ती, माला आदि पूजन सामग्री लिए भगवान का इंतजार कर रही थीं। एक माता चलने में असमर्थ थी वह रास्ते के किनारे ही बैठ गई महाराज जी को प्रणाम करना चाह रही थी तब राजेश्री महन्त जी ने कहा- माताजी वहीं रुक जाइए मैं स्वयं आ जाता हूं। उन्होंने उनके पास पहुंचकर आशीर्वाद प्रदान किया। यह दृश्य देखकर लोग काफी भावुक हो गए।
शोभायात्रा में विशेष रूप से चित्रकूट, वृंदावन एवं अयोध्या से पधारे हुए संत महात्माओं के अतिरिक्त हेमंत दुबे, निरंजन लाल अग्रवाल, योगेश शर्मा, नारायण खंडेलिया,राधेश्याम शर्मा, अशोक शर्मा, कमलेश सिंह, हर प्रसाद साहू, प्रमोद सिंह, देव कुमार पांडे, बृजभान सिंह,ज्ञानेश शर्मा, जगदीश यादव, खगेंद्र पांडे, खगेश वैष्णव, गेंदु राम आदित्य,प्रतीक शुक्ला, पुरेन्द्र सोनी,मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव, हर्ष दुबे, अंकित दुबे सहित अनेक गणमान्य नागरिक गण एवं नगर निवासी बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए।

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