प्रयागराज में माघ मेला 2026 की शुरुआत होते ही संगम तट श्रद्धा और भक्ति के महासंगम में बदल गया। पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर पहले मुख्य स्नान के साथ इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का विधिवत आगाज़ हुआ। कड़ाके की ठंड के बावजूद तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ संगम घाटों पर उमड़ पड़ी और चारों ओर “हर-हर गंगे” के जयकारे गूंजते रहे।
संगम की रेती पर बसाई गई तंबुओं की विशाल नगरी में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। पहले स्नान पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाई। 44 दिनों तक चलने वाले इस मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना जताई गई है, जबकि लगभग 20 लाख कल्पवासी 3 जनवरी से 1 फरवरी तक कल्पवास करेंगे।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मेला क्षेत्र में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) की टीमें भी मोर्चे पर हैं। इसके अलावा 17 अस्थायी थाने और 42 पुलिस चौकियां बनाई गई हैं। यातायात को सुचारू रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।
सात सेक्टरों में फैला मेला, टेंट सिटी का स्वरूप
माघ मेला सात सेक्टरों में विभाजित किया गया है। महाकुंभ के मॉडल पर आधारित टेंट सिटी की तर्ज पर करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में मेला बसाया गया है। 126 किलोमीटर लंबे मार्ग चेकर्ड प्लेट से तैयार किए गए हैं। रात के समय एलईडी लाइट से सजी नावें, रंगीन फव्वारे और घाटों पर बने कलर-कोडेड चेंजिंग रूम मेले की सुंदरता को और बढ़ा रहे हैं।
पौष पूर्णिमा से कल्पवास की शुरुआत
पौष पूर्णिमा के साथ ही कल्पवासियों का व्रत भी शुरू हो गया है। आचार्य चौक, दंडीवाड़ा, खाक चौक, तीर्थ पुरोहितों और प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के शिविर पूरी तरह तैयार हैं। प्रथम पुण्य स्नान के साथ संगम तट पर आस्था, परंपरा और संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है।
आवागमन, सफाई और अग्नि सुरक्षा
शहर से मेला क्षेत्र तक रंगीन संकेतक बोर्ड और हेल्प डेस्क लगाए गए हैं। परिवहन के लिए 3800 रोडवेज बसें, 75 ई-बसें और 500 से अधिक ई-रिक्शा तैनात किए गए हैं। अग्नि सुरक्षा के लिए 17 फायर स्टेशन और स्वच्छता के लिए 3300 सफाईकर्मी लगातार कार्यरत रहेंगे।
महाकुंभ अनुभवों से सशक्त व्यवस्थाएं
महाकुंभ के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए संगम क्षेत्र को जोड़ने के लिए सात पांटून पुल बनाए गए हैं, जबकि फाफामऊ क्षेत्र में दो अतिरिक्त पुल तैयार किए गए हैं। दिशा-विशेष के अनुसार आरक्षित इन पुलों से श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान और सुरक्षित बनाया गया है।




