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यूनेस्को ने दीपावली को दी वैश्विक पहचान, अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल

भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है कि यूनेस्को ने दीपावली को अपनी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय समिति की बैठक में लिए गए इस निर्णय ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है।

क्यों खास है यह फैसला?
दीपावली सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि अच्छाई की बुराई पर जीत और आशा का प्रतीक है। यह परंपरा पीढ़ियों से भारतीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा रही है। यूनेस्को की इस मान्यता से भारतीय परंपराओं को संरक्षित करने और दुनिया भर में उनके महत्व को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री का बयान
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दीपावली का यूनेस्को सूची में शामिल होना भारत की आस्था और सभ्यता का वैश्विक सम्मान है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के अनेक प्रयास हुए हैं।

वैश्विक स्तर पर क्या बदलेगा?

दीपावली को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलेगी
भारत के सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
विश्वभर में शोध और अध्ययन के नए अवसर बनेंगे
भारत की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी

भारत की अन्य परंपराएं जो यूनेस्को सूची में शामिल हैं

कुंभ मेला
गरबा
दुर्गा पूजा
योग

इस वर्ष यूनेस्को को 78 देशों से 67 नामांकन मिले। भारत ने दीपावली को विरासत के रूप में प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह त्योहार शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है, जिसे सदियों से संजोया गया है।

दिल्ली में दीपावली का विशेष जश्न
यूनेस्को के इस फैसले के बाद राजधानी दिल्ली में आज फिर दिवाली जैसा माहौल है। लालकिला, इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन, कर्तव्य पथ और चांदनी चौक सहित कई स्थानों पर दीये, लाइटिंग और रंगोलियों से सजावट की जा रही है।

दिल्ली के संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि सभी प्रमुख ऐतिहासिक और सरकारी भवनों को रोशनी से जगमगाया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम लालकिला परिसर में आयोजित किया जाएगा।

यह फैसला न सिर्फ भारत की सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान है, बल्कि विश्व मंच पर भारतीय विरासत की बढ़ती प्रभावशीलता का प्रतीक भी है।

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