ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा जोनस ने हाल ही में अपने बचपन के संघर्ष और करियर के शुरुआती दिनों की कुर्बानियों पर खुलकर बात की। अबू धाबी में आयोजित एक समिट के दौरान उन्होंने बताया कि आज जो आजादी उन्हें प्रोजेक्ट चुनने में मिली है, उसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत और कई निजी त्याग छुपे हैं।
कड़ी मेहनत और छूटीं जीवन की खुशियां
प्रियंका ने कहा कि कम उम्र में सफलता पाने के लिए उन्हें कई महत्वपूर्ण चीज़ें छोड़नी पड़ीं—जन्मदिन, त्योहार, परिवार के साथ समय, और यहां तक कि अपने पिता की बीमारी के दौरान उनका साथ भी नहीं दे पाईं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अक्सर उन्हें सेट पर लौटने के लिए कहते थे, लेकिन आज उन्हें महसूस होता है कि वह समय दोबारा नहीं लौट सकता। यही उनकी सबसे बड़ी कमी रह गई।
करियर की वजह से हुए बड़े त्याग
उन्होंने कहा कि 20 साल की उम्र में काम को रोमांटिक अंदाज में देखा जाता था, और ऐसा माना जाता था कि सफलता पाने के लिए निजी जिंदगी को पीछे छोड़ना जरूरी है। प्रियंका ने माना कि यह हमेशा सही नहीं होता, लेकिन उस समय उनके लिए मेहनत करना ही एकमात्र रास्ता था।
उन्होंने कहा, “अगर मैंने बचपन में इतनी मेहनत और त्याग नहीं किए होते, तो आज मेरे पास यह आजादी नहीं होती कि मैं अपनी मर्जी से प्रोजेक्ट चुन सकूं।”
वर्कफ्रंट पर कई बड़े प्रोजेक्ट
प्रियंका चोपड़ा जल्द ही एस.एस. राजामौली की महत्वाकांक्षी फिल्म वाराणसी में नजर आएंगी, जिसमें महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन भी शामिल हैं। इसके अलावा वह सिटाडेल 2 की तैयारियों में जुटी हैं और हॉलीवुड फिल्म द ब्लफ में भी अहम भूमिका निभाने वाली हैं।




