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धरा रह जाएगा डोनाल्‍ड ट्रंप का टैरिफ, भारत पर होगा आटे में नमक बराबर असर

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भारत सहित कई देशों की वस्‍तुओं पर ज्‍यादा टैरिफ लगाने का ऐलान कर चुके हैं, जो अमेरिकी सामानों पर ज्‍यादा टैक्‍स वसूलते हैं. टैरिफ बढने से भारत के निर्यात पर इसका क्‍या असर होगा, इसका आंकलन किया जा रहा है. एसबीआई रिसर्च ने भी इस बारे में एक रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट के अनुसार,  टैरिफ वृद्धि का भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. यदि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 15-20% तक आयात शुल्क बढ़ाता है, तो भी इसका भारत के कुल निर्यात पर केवल 3-3.5% तक प्रभाव पड़ेगा.

भारत अपनी लचीली व्यापार नीति, निर्यात में विविधता और रणनीतिक साझेदारियों के चलते इस जोखिम को सीमित करने में सक्षम है. भारत ने अपने निर्यात को कई देशों में फैला लिया है और नए बाजारों की तलाश कर रहा है, जिससे व्यापार में संभावित गिरावट की भरपाई हो सकती है. गौरतलब है कि अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है. वित्त वर्ष 2024 में भारत के कुल निर्यात का 17.7% हिस्सा अकेले अमेरिका को गया.

लगातार बदल रहा है टैरिफ
पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका दोनों ने अपने आयात-निर्यात शुल्क (टैरिफ) में कई बदलाव किए हैं. अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाया है, जो 2018 में 2.72% था और 2021 में बढ़कर 3.91% हो गया. 2022 में यह मामूली गिरावट के साथ 3.83% पर आ गया. भारत ने भी अमेरिका से आयातित उत्पादों पर अपेक्षाकृत अधिक टैरिफ वृद्धि की है. 2018 में यह 11.59% था, जो 2022 में बढ़कर 15.30% तक पहुंच गया.

टैरिफ वृद्धि का भारत पर कितना होगा असर?
SBI रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, यदि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 15-20% तक आयात शुल्क बढ़ाता है, तो भी इसका भारत के कुल निर्यात पर केवल 3-3.5% तक प्रभाव पड़ेगा. इसका कारण यह है कि निर्यात के लिए भारत अब केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं है, बल्कि यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया के अन्य देशों से भी व्यापार बढ़ा रहा है. भारत अपने मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को लगातार मजबूत कर रहा है, जिससे उसके उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं. भारत की व्यापार नीति इतनी लचीली है कि वह नीतिगत बदलावों के प्रभाव को सीमित कर सकती है.

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