छत्तीसगढ़

देशी तकनीक, आधुनिक सोच और जैविक खेती का अनूठा संगम |

सोना राम मुड़ामी ने लाईट ट्रेप से कीट नियंत्रण कर रचा मिसाल |

कम लागत, अधिक उत्पादन और सुरक्षित खेती से बदली किस्मत |

नितेश मार्क—-
दंतेवाड़ा, 21 जनवरी 2026।
गीदम विकासखंड अंतर्गत ग्राम कटूलनार के प्रगतिशील किसान सोना राम मुड़ामी ने यह सिद्ध कर दिया है कि आज की खेती केवल परंपरागत तरीकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह तकनीक, नवाचार और समझदारी का समन्वय बन चुकी है। सीमित संसाधनों और कम भूमि के बावजूद उन्होंने ऐसी खेती का मॉडल तैयार किया है, जो आज पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।
मुड़ामी द्वारा 0.50 हेक्टेयर भूमि में विकसित किया गया बहुफसली जैविक खेती मॉडल उनकी दूरदर्शी सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है। इस क्षेत्र में उन्होंने मुख्य फसल के रूप में टमाटर लगाया है, वहीं साथ में मूली, लाल भाजी एवं पालक की जैविक पद्धति से मिश्रित खेती की जा रही है। इस बहुफसली प्रणाली से भूमि का अधिकतम उपयोग संभव हुआ है। अलग-अलग समय पर फसलों के तैयार होने से उन्हें नियमित और स्थिर आय प्राप्त हो रही है। यदि किसी कारणवश एक फसल प्रभावित होती है, तो दूसरी फसल किसान की आय को संभाल लेती है।
ड्रिप सिंचाई से जल संरक्षण और उत्पादन में वृद्धि
जल संकट के इस दौर में मुड़ामी ने ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाकर यह साबित किया है कि कम पानी में भी अधिक उत्पादन संभव है। इस प्रणाली से पौधों को आवश्यकतानुसार नमी मिलती है, खरपतवार कम उगते हैं और फसलें अधिक स्वस्थ रहती हैं। साथ ही पानी की बचत होती है, जिससे यह खेती मॉडल जल संरक्षण का सशक्त उदाहरण बन गया है।
देशी लाईट ट्रेप से कीट नियंत्रण – बिना रसायन, बिना खर्च
फसल को कीटों से बचाने के लिए सोना राम मुड़ामी ने रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भर रहने के बजाय देशी जुगाड़ से तैयार लाईट ट्रेप तकनीक अपनाई। इस लाईट ट्रेप के माध्यम से हानिकारक कीट प्रकाश की ओर आकर्षित होकर नष्ट हो जाते हैं।
इस नवाचार के प्रमुख लाभ है |
फसल कीटनाशक मुक्त रहती है |
लागत लगभग नगण्य
मिट्टी और पर्यावरण दोनों सुरक्षित किसानों को स्वास्थ्य और खर्च दोनों में लाभ
यह प्रयोग यह संदेश देता है कि यदि बुद्धि और नवाचार हो, तो बड़े समाधान कम संसाधनों में भी संभव हैं।
जैविक खेती से गुणवत्ता, स्वास्थ्य और भरोसे की पहचान मुड़ामी की खेती की सबसे बड़ी विशेषता है रसायन मुक्त, ताजी और स्वादिष्ट सब्जियों का उत्पादन। उनकी जैविक सब्जियों की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है और उपभोक्ताओं का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। इसी कारण उन्हें अपनी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य प्राप्त हो रहा है।
आज ग्राम कटूलनार से लेकर पूरे गीदम विकासखंड में सोना राम मुड़ामी की खेती को ड्रिप आधारित, जैविक और नवाचारयुक्त आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। उनकी सफलता यह स्पष्ट संदेश देती है कि जमीन छोटी हो सकती है, लेकिन सोच बड़ी हो तो खेती से सम्मान, आय और आत्मनिर्भरता—तीनों एक साथ हासिल की जा सकती हैं।
सोना राम मुड़ामी की यह सफलता कहानी न केवल किसानों को नई दिशा देती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि स्थायी, सुरक्षित और लाभकारी खेती ही भविष्य की खेती है।

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