गरियाबंद | उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में मानव–वन्यजीव संघर्ष के बीच साहस और तत्परता की मिसाल देखने को मिली। शिकारियों के फंदे में फंसे गंभीर रूप से घायल तेंदुए को बचाने के लिए जब तकनीक साथ नहीं दे सकी, तब वन विभाग के अधिकारी ने खुद मोर्चा संभालते हुए जान पर खेलकर तेंदुए को रेस्क्यू किया।
ड्रोन झाड़ियों में हुआ बेअसर
25 दिसंबर को तौरेंगा बफर क्षेत्र के ग्राम कोकोड़ी से सूचना मिली कि एक तेंदुआ बस्ती के पास झाड़ियों में छिपा है। ड्रोन से निगरानी की गई, लेकिन घनी झाड़ियों के कारण उसकी उपयोगिता सीमित रही। तेंदुए के गले में गहरे घाव नजर आए और वह अत्यंत आक्रामक स्थिति में था।
ग्रामीणों की सुरक्षा बनी प्राथमिकता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एंटी पोचिंग टीम के नोडल अधिकारी एसडीओ ने बिना देरी किए अकेले रस्सी का जाल लेकर तेंदुए को दबोच लिया। रेस्क्यू के दौरान तेंदुए ने हमला भी किया, लेकिन समय रहते उसे काबू कर लिया गया। इससे ग्रामीणों और बच्चों पर संभावित हमले का खतरा टल गया।
फंदों से मुक्त कर मिला जीवनदान
तेंदुए के गले में दो क्लच वायर फंदे फंसे थे, जो करीब सात दिनों से उसकी जान के दुश्मन बने हुए थे। जंगल सफारी की मेडिकल टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे बेहोश किया, फंदे निकाले और प्राथमिक इलाज किया। इसके बाद तेंदुए को तड़के सुबह जंगल सफारी अस्पताल लाया गया, जहां उसकी हालत अब स्थिर है।
अवैध शिकार पर सख्त कार्रवाई
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध शिकार और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान जारी है। बीते सात दिनों में 19 शिकारी पकड़े गए हैं। फंदा लगाने वालों की सूचना देने पर 5 से 10 हजार रुपये तक का गोपनीय इनाम भी घोषित किया गया है।
स्वस्थ होने के बाद तेंदुए को फिर से सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा।





