जीएसटी परिषद की 3 सितम्बर 2025 को हुई बैठक में कर दरों में बदलाव को सरकार “जीएसटी 2.0” के नाम से पेश कर रही है।
जिसमे क्रांति बंजारे सदस्य पूर्व जिला पंचायत राजनांदगांव ने कहा
1. स्वागत योग्य पहल, मगर देर से
आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर कर कटौती काग़ज़ पर राहत जैसी लगती है।
लेकिन सवाल यह है कि जब महंगाई सालों से लगातार बढ़ रही थी, तब सरकार ने जनता को राहत क्यों नहीं दी? आज जब चुनाव नज़दीक हैं, तभी यह सुधार क्यों याद आया?
असली राहत उपभोक्ता तक पहुँचे
टैक्स दरों में कटौती तभी उपयोगी होगी, जब इसका असर बाज़ार की वास्तविक कीमतों पर दिखे। आशंका है कि यह कदम केवल बड़े उद्योगपतियों के लिए लाभकारी साबित न हो जाए। सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि हर उपभोक्ता की जेब को सीधा फायदा पहुँचे।
छोटे व्यापारियों की वास्तविक समस्या
अनुपालन (Compliance) को ‘सरल’ करने भर से छोटे व्यवसायी की मुसीबतें समाप्त नहीं होंगी। उन्हें सस्ती पूँजी, ऋण सुविधा और बाज़ार में सुरक्षित हिस्सेदारी जैसे ठोस उपाय चाहिए।
जीएसटी दर कटौती की जमीनी निगरानी हो ताकि राहत कागज़ पर न रहे।
छोटे व मझोले व्यापारियों के लिए वित्तीय सहयोग पैकेज दिया जाए।
राज्यों को जीएसटी नीति निर्धारण में समान भागीदारी मिले।
क्रांति बंजारे ने कही कि हम किसी भी निर्णय का समर्थन करेंगे जो सचमुच आम आदमी के जीवन में राहत लाए। लेकिन यह भी सरकार की जिम्मेदारी है कि जनता से यह पूछें—क्या जीएसटी 2.0 हकीकत में जन-कल्याणकारी सुधार है, या फिर केवल सरकार की राजनीतिक घोषणा?
क्रांति बंजारे सदस्य पूर्व जिला पंचायत राजनंदगांव





