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करीब आ रहा डॉलर का अंत….दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों का कम हो रहा भरोसा, 35 साल में पहली बार सामने आया ऐसा आंकड़ा

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप कितनी भी दादागिरी और धौंस दिखाने की बात करें, लेकिन डॉलर का अंत अब करीब आ रहा है. 35 साल में पहली बार ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिसे देखकर ट्रंप ही नहीं पूरे अमेरिका की आंखें खुली रह जाएंगी. इन आंकड़ों में साफ दिख रहा है कि अब दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों का डॉलर पर भरोसा कम होता जा रहा है. केंद्रीय बैंक अपने खजाने में डॉलर जमा करने के बजाय सोने पर दांव लगा रहे हैं.
दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों से जुटाए आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि साल 1990 के बाद पहली बार अमेरिकी सरकार के बॉन्‍ड (ट्रेजरीज) का भंडार सोने के मुकाबले कम हो गया है. दरअसल, दुनियाभर सभी देशों के सेंट्रल बैंक अपनी सुरक्षा और आपात स्थिति के लिए रिजर्व रखते हैं. इसमें ज्‍यादातर अमेरिकी डॉलर का भंडार होता है, जबकि कुछ मात्रा में यूरो, सरकारी बॉन्‍ड और गोल्‍ड भी होते हैं. हाल के आंकड़े बताते हैं कि अब केंद्रीय बैंकों ने ज्‍यादातर भंडार डॉलर के बजाय गोल्‍ड से भरना शुरू कर दिया है.

क्‍या कहती है रिपोर्ट
‘यूरोपियन सेंट्रल बैंक इंटरनेशनल रोल ऑफ द यूरो 2025’ नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी केंद्रीय बैंकों के पास कुल मिलाकर 36,000 टन सोना रखा हुआ है. अगर मौजूदा बाजार भाव से इसकी कीमत निकालें तो करीब 3.6 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 310 लाख करोड़ रुपये होगी. जून, 2024 के सर्वे के अनुसार, इस दौरान डॉलर की वैल्‍यू करीब 3.8 ट्रिलियन बताई गई है. यह आंकड़ा एक साल पहले का है और अभी सोने की कीमत 3,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जिसकी वजह से सोने की वैल्‍यू निश्चित रूप से डॉलर से ज्‍यादा पहुंच गई है.

क्‍यों गोल्‍ड की तरफ भाग रहे बैंक
वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंसिल और यूरोपियन सेंट्रल बैंक के अनुसार, यूक्रेन से युद्ध के बाद रूसी सेंट्रल बैंक के पास जमा डॉलर और यूरो को लॉक कर दिया गया था. इसके बाद से सेंट्रल बैंकों ने ऐसे विकल्‍प की तलाश शुरू कर दी जिससे ‘सैंक्‍शन प्रूफ’ बनाया जा सके. गोल्‍ड इस मामले में सबसे ऊपर है, जो कभी फ्रीज नहीं किया जा सकता.
अमेरिका पर लगातार कर्जा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में किसी तरह की परेशानी आने पर डॉलर पर भी संकट बढ़ सकता है. लिहाजा सेंट्रल बैंक अपनी पूंजी अमेरिका के कर्ज में नहीं फंसाना चाहते.
सेंट्रल बैंक अपने एसेट का डाईवर्सिफिकेशन भी कर रहे हैं, क्‍योकि वह सारी पूंजी एक ही जगह फंसाना नहीं चाहते हैं. यही वजह है कि सेंट्रल बैंक डॉलर, यूरो, गोल्‍ड का मिक्‍स एसेट बनाना चाहते हैं.
कितना गोल्‍ड खरीद रहे बैंक
वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंसिल की मानें तो बैंकों ने साल 2022 में 1,082 टन सोना खरीदा, जबकि 2023 में 1,037 टन तो 2024 में 1,045 टन सोने की खरीद की है. यह खरीद एक दशक पहले की औसत सालाना खरीद से करीब दोगुना है. साल 2025 में अभी तक सोने की खरीद कम रही, लेकिन कीमतें नीचे आते ही इसके फिर बढ़ने की संभावना है. इस साल पहली तिमाही में 244 टन सोना खरीदा गया, जबकि दूसरी तिमाही में 166 टन सोने की खरीदारी हुई. लंदन कंसल्‍टेंसी ने भी अनुमान लगाया है कि इस साल 1,000 टन सोने की खरीद हो जाएगी.

आगे और बढ़ेगी डॉलर की मुसीबत
विश्‍व स्‍वर्ण परिषद का मानना है कि 43 फीसदी केंद्रीय बैंक आगे भी सोने की खरीद का प्‍लान बना रहे हैं.
95 फीसदी लोगों का मानना है कि सोने की कीमत अभी आगे और बढ़ेगी.
आरबीआई ने भी मार्च, 2025 तक अपने सोने का भंडार बढ़ाकर 880 टन पहुंचा दिया है.
डॉलर की बादशाहत अब भी बनी हुई है, क्‍योंकि आईएमएफ के अनुसार 2025 तक फॉरेक्‍स रिजर्व में 58 फीसदी हिस्‍सेदारी डॉलर की ही है.

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